पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से निधन

नागपूर : पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद एम्स में भर्ती किया गया था. उस समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, नितिन गडकरी एम्स में मौजूद थे.

मृत्यु के तीन घंटे पहले सुषमा स्वराज ने कश्मीर मुद्दे पर फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देता ट्वीट किया था।

सुषमा स्वराज के बारे में कहा जाए तो, सुषमा ने सबसे पहला चुनाव १९७७ में लड़ा. तब वे २५ साल की थीं. वे हरियाणा की अंबाला सीट से चुनाव जीतकर देश की सबसे युवा विधायक बनीं. उन्हें हरियाणा की देवीलाल सरकार में मंत्री भी बनाया गया. इस तरह वे किसी राज्य की सबसे युवा मंत्री रहीं.

१९९८ में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं
नब्बे के दशक में सुषमा स्वराज राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गईं. अटलजी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया. १९९८ में उन्होंने अटलजी की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. हालांकि, इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई. पार्टी की हार के बाद सुषमा ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं.

१९९९ में बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया से हारीं थी. 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में सुषमा दक्षिण दिल्ली से सांसद बनी थीं. इसके बाद 13 दिन की अटलजी की सरकार में उन्हें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया था. मार्च 1998 में दूसरी बार अटलजी की सरकार बनने पर वे एक फिर से आईबी मिनिस्टर बनीं थी. 1999 में उन्होंने बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन वे यहां हार गईं.

सुषमा 2009 और 2014 में विदिशा से लोकसभा चुनाव जीतीं. 2014 से 2019 तक वे विदेश मंत्री रहीं और दुनियाभर में भारतीयों को उन्होंने एक ट्वीट पर मदद मुहैया कराई. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों के चलते 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था. भाजपा की जीत के बाद मन जा रहा था कि वे दोबारा विदेश मंत्री बनेंगी, लेकिन उन्होंने खराब सेहत के चलते मंत्री पद नहीं लिया.

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